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एक पाठक की तलाश


एक पाठक की तलाश

पेम्पा तामाङ

उसे साहित्य हर पल उलझाए रखता था। उसकी पढ़ने की आदत कहानी से निर्मित हुई थी। छोटी उम्र में हातिमताईवीरसिक्काएकदेव ढकाल विरचित आतंकराक्षस राजसिंदबाद की कहानियाँ खूब रस लेकर पढ़ता था। कुछ बाद में संभवतः सातवीं कक्षा में होगा तो प्रकाश कोविदसुरेश राई की     कहानियाँ पढ़ने लगा था। उस दौरान वह शिवकुमार राई की कहानियाँ भी पढ़ने लगा था। वह सोचने लगा था कि क्या उसकी पढ़ी कहानियाँ साहित्य हैंकौन साहित्य है और कौन साहित्य नहीं है?

कहानियाँ क्या शिक्षा और ज्ञान के लिए लिखी जाती हैंलेकिन क्यों कहानियाँ पढ़ते समय आनंद आता हैएक कहानी पढ़ने के बाद दूसरी पढ़ने की इच्छा जगना। उसके मन में ऐसे ही सवाल कुलबुलाते रहते थे। बाद में स्नातक स्तर में उसने अपना प्रमुख विषय नेपाली साहित्य चुना- स्नातक सम्मान लेकर उत्तीर्ण हुआ। उसी दौरान उसने कहानी लिखने का प्रयास किया। कुछ कहानियाँ लिखी भी लेकिन संतुष्टि नहीं हुई। उपन्यास भी लिखा लेकि न छपाने की हिम्मत नहीं हुई।

विश्वविद्यालय में अध्ययनरत उसने एक-दो कहानी प्रतियोगिताओं में भाग लिया लेकिन पुरस्कार पाने में हार का मुँह देखना पड़ा।

ऐसे ही टूटी उम्मीदों और निराशाओं के संकरे परिवेश में रह।        ते दिल बहलाने    अअअअअअअअअअअअअअअअअअअअअाााााााााअअचभचचचचभभभववववक ब                            पढ़ने की इच्छा हुई।  बादशाह 😚 के वजीर की बेटी शहरजाद द्वारा एक हजार रातों तक सुनाई गई इन कहानियों को जब वह पढ़ने लगा तो उसे बचपन में पढ़ी सिन्दबाद के साहसिक कारनामेहातिमताई की कहानी– सभी की स्मृति ताजा हो उठी। लेकिन कुछ गंभीर चिन्तन करने पर पता चला कि ‘अरेबियन नाइट्स’ एक महिला शहरजाद द्वारा खुद को और दूसरी अनेक औरतों को बचाने की कहानियाँ हैं। उसने इन कहानियों का पुनर्पाठ करना शुरू कर दिया। एक बादशाह अपनी बेगम से विश्वासघात करने के लिए एक कठोर और बेरहम फैसला लेता है। वह बादशाह हर रोज एक नई औरत से निकाह करता है और दूसरे दिन उसका कत्ल कर देता है। इस बेरहम हरकत से सारा मुल्क दहशत से काँपने लग जाता है। उसकी इस तरह की हरकतों के चलते सारी नारी जाति का विनाश होने और मानव जाति का ही अन्त्य होने के हालात पैदा होते दिखने लगते हैं। ऐसे हालात में अपनी बारी आने से पहले ही शहरजाद ने उस बादशाह से निकाह करने की इच्छा जाहिर की। निकाह के बाद बादशाह के साथ शयन कक्ष में शहरजाद बादशाह को एक कहानी सुनाने की फरयाद करती है। बादशाह की स्वीकृति के बाद शहरजाद कहानी सुनाने लगती है। बेगम एक ऐसी धारावाहिक कहानी सुनाने लगती है जिसका कोई अन्त नहीं होता। सोने से पहले शहरजाद एक अधूरी कहानी छोड़ देती है– और बादशाह उस कहानी को दूसरे दिन सुनने की ख्वाहिश जाहिर करता है। उसी दिन से बेगम की हत्या टल जाती है। यह सिलसिला जारी रहता है और अधूरी कहानी के चलते शहरजाद की हत्या भी टलती जाती है।

इस तरह एक हजार रातें बीत जाती हैं फिर भी कहानी खत्म नहीं होती। बादशाह हताश होकर बेगम की हत्या करने का विचार त्याग देता है और इस तरह शहररजाद ने खुद को और नारी जाति की रक्षा की थी।

वास्तव में शहरजाद ने काल्पनिकमनगढ़न्त अफसाने सुनाए थे लेकिन वे सभी अफसाने समूची नारी जाति के अस्तित्व पर आधारित थे। अफसानों में सभ्यता और जीवन की धड़कनें होती हैं – जीवन जिन्दा होती है।

***

शहरजाद कथाकार बादशाह पाठक। कथाकार और पाठक के मिलन से एक सभ्यता बच गई थी।

हर युग में शहरजाद पैदा होनी चाहिए और बादशाह भी। जिन्दगी के लिए अफसाने जरूरी हैं। उसे ऐसे ही अफसानों की जरूरतगांभीर्य और महत्व का अहसास होता है और लगता है कि कहानी लिखी जानी ही चाहिए– इसी दायित्वबोध उत्साहित उसने काफी वक्त लगाकर एक कहानी लिखी। कहानी लिख लेने के बाद उसे लगा कि उसने एक अहम् उत्तरदायित्व पूरा कर लिया है।

इस कहानी को छपवानेपाठकों तक पहुँचाने का भी उतना ही महत्व है– सभ्यता को बचानामानवता को बचानासृष्टि को बचाए रखना...

कहानी की कुछ प्रतिलिपियाँ मित्रों को भी भेजीं। कहीं से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई। संभवतः किसी ने पढ़ी ही नहीं।

पत्रिकाओं में भेजी लेकिन छपी नहीं। लगा कि संपादक ने पढ़े बिना ही रद्दी की टोकरी में फेंक दी।

एक साहित्यिक गोष्ठी में उक्त  कहानी का पाठ करने का प्रस्ताव रखा लेकिन आयोजक ने कहानी लम्बी होने और समय की कमी का हवाला देकर पढ़ने की स्वीकृति नहीं दी।

कथाकार हताश हो जाता है। वह हैरान था कि आजकल कहानी पढ़ी नहीं जाती। उसे लगा कि अब दुनिया कथाविहीन हो जाएगी। ऐसा सोचते ही वह भयातुर हो जाता है। कथाविहीन संसार उजाड़ होगामरुस्थल से समान होगा। उसे तलाश करनी होगी इस मरुभूमि में मरुद्यान की अर्थात् जीवन की और पाठक की। कहाँ गुम हो गए वे पाठककहाँ छुप कर बैठे हैंतलाशना ही पड़ेगा कहानी के पाठक को!

पाठक की तलाश में उसने जन संचार माध्यमों का सहारा लेने का फैसला किया। एक विज्ञापन का मसौदा तैयार किया। पाठक न होने से कथाकार की कलम रुक जाएगी और कथाकार की कलम रुक जाने से कहानी का जन्म नहीं होगा। यकीननपाठक में कहानी जिंदा रहती है। पाठक की तलाश करनी ही होगी। उस विज्ञापन का मसौदा उसने स्थानीय समय दैनिक में प्रकाशनार्थ भेजा –

गुमशुदा पाठक की सूचना

पाठक का नामः गोरखाली या नेपाली

पताः सगरमाथा और कंचनजंघा की गोद

कदः औसत 5 पीट 3 ईंच

वर्णः गेहुआँपीत एवं श्यामवर्ण।

उपरोक्त व्यक्ति कहीं मिले तो उसे निम्नलिखित पते पर सूचित करने का अनुरोध हैः

कथाकारकल्पकुंज निवासटिस्टा-रंगीत मार्गहिमालय प्रदेश।

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